देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी हाकम सिंह की करीब 63 लाख रुपये मूल्य की चल एवं अचल संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच कर दी है। यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है।
ईडी की जांच में सामने आया है कि हाकम सिंह ने स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा और वीपीडीओ भर्ती परीक्षा सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के अभ्यर्थियों से कथित तौर पर करीब एक करोड़ रुपये वसूले थे। जांच में यह भी सामने आया कि परीक्षा आयोजित करने वाली आरएमएस टेक सॉल्यूशन के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भी कथित संलिप्तता रही है। फिलहाल ईडी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
यूकेएसएसएससी भर्ती घोटाले का खुलासा वर्ष 2022 में हुआ था, जब स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले लीक होने की बात सामने आई। जांच के दौरान कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, जिनमें हाकम सिंह को मास्टरमाइंड माना गया। बाद में वीपीडीओ सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए। एसटीएफ ने इस मामले में दर्जनों आरोपियों को गिरफ्तार किया और करोड़ों रुपये के लेनदेन का खुलासा किया।
पेपर लीक प्रकरण के बाद राज्य सरकार ने नकल माफिया पर सख्ती करते हुए उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं उपाय) अधिनियम, 2023 लागू किया। इस कानून के तहत पेपर लीक या भर्ती परीक्षाओं में धांधली के दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास, 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना और अपराध को संज्ञेय, गैर-जमानती एवं अशमनीय श्रेणी में रखा गया है। ईडी की ताजा कार्रवाई को भर्ती घोटाले में शामिल आरोपियों के खिलाफ अब तक की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक कार्रवाई माना जा रहा है। जांच एजेंसियां मामले में शामिल अन्य लोगों और अवैध संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही हैं।